गुरुवार, 22 सितंबर 2011


प्रवासी दुनिया से साभार-

बधिर लोगों की मांगे हमे सुननी होगी…(23 सितम्बर, बधिर दिवस पर विशेष)




नई दिल्ली। प्रत्येक व्यक्ति में असीम सम्भावनाएं होती हैं। जरूरत होती है उन्हें थो़डा निखारने और उन्हें एक एक सही दिशा देने की। यह अलग बात है कि शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति सहयोग न मिलने पर सामान्य व्यक्ति से पिछ़डा हुआ महसूस करता है लेकिन सामाजिक, आर्थिक और मानसिक सहयोग प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जो़डा जा सकता है।

कुछ इसी उद्देश्य को लेकर विश्व बधिर संघ (डब्ल्यूएफडी) ने वर्ष 1958 से विश्व बधिर दिवस की शुरूआत की। इस दिन बधिरों के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक अधिकारों के प्रति लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने के साथ-साथ समाज और देश में उनकी उपयोगिता के बारे में भी बताया जाता है। संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त इस गैर सरकारी संगठन के इस समय 130 देश सदस्य हैं। समय-समय पर आयोजित होने वाले सम्मेलनों में बधिरों के कल्याण के लिए योजनाओं के बारे में चर्चा की जाती है।

डब्ल्यूएफडी के आंक़डों के अनुसार विश्व की करीब सात अरब आबादी में बधिरों की संख्या 70 लाख के आस पास है। इस संख्या का 80 फीसदी विकासशील देशों में पाया जाता है। भारत की बात करें तो 2001 के आंक़डों के अनुसार देश की एक अरब आबादी में बधिरों की संख्या 13 लाख के आसपास है। बधिरों की शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत विशेष रूप से प्रशिक्षित अध्यापकों की नियुक्ति की है। इसके अलावा बधिरों को आर्थिक रूप से सबल बनाने के लिए व्यवसायिक प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की गई है।

बधिर दिवस के मौके पर लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए 23 सितम्बर को दिल्ली में इंडिया गेट से जंतर मंतर तक मार्च का आयोजन किया जा रहा है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय बधिरों के कल्याण के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों को भी दीन दयाल उपाध्याय योजना के तहत सहायता भी मुहैया करा रहा है। साथ ही बधिरों को नौकरी देने वाली कम्पनियों को छूट का भी प्रावधान है।

बधिरों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन “नोएडा डेफ सोसायटी” की रूमा रोका ने कहा, “”सबसे ब़डी समस्या जागरूकता का अभाव है। हमारे यहां व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए आने वाले अधिकतर बच्चो देश के पिछ़डे इलाकों से आते हैं। समाज के पिछ़डे तबकों से सम्बंधित इनके अभिभावकों में जागरूकता एवं सुविधाओं के अभाव के कारण इन बच्चों के पास मूलभूत ज्ञान का अभाव होता है।”"

इस विषय पर नोएडा जिला अस्पताल में कान, नाक एवं गला के चिकित्सक डॉ पी. के. सिंह ने कहा, “”प्रदूषण के कारण धीरे-धीरे बहरापन महामारी का रूप चुका है। कोई प्रत्यक्ष लक्षण न दिखने के कारण इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।”" देश में बहरेपन के उपलब्ध इलाज पर असंतोष जताते हुए डॉ सिंह ने कहा, “”रोगी-चिकित्सक अनुपात अमेरिका में 160 पर और ब्रिटेन में 500 पर एक का है। जबकि भारत में यह अनुपात सवा लाख पर एक चिकित्सक का बैठता है। सरकारी अस्पतालों में भी सुविधाओं की कमी है।”" पिछ़डे इलाकों में यह अंतर और भी ज्यादा है। योग्य चिकित्सकों की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कान के आपरेशन के लिए दिल्ली के प्रतिष्ठित भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में छह-छह महीने की प्रतीक्षा सूची है। सिंह ने बताया कि बधिर लोगों के लिए सुनने में सहायता देने वाले उपकरण (हियरिंग एड) की कम से कम कीमत 15,000 रूपये है, जो सामान्य लोगों की पहुंच के बाहर है। दूसरी तरफ सरकारी प्रयास भी इस दिशा में नाकाफी सिद्ध हो रहे हैं। आज भी महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे एवं बस स्टेशन पर इन लोगों की सहायता के लिए किसी भी प्रकार की व्यवस्था नहीं है।

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प्रवासी दुनिया से साभार-

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गुरुवार, 15 सितंबर 2011

उपकरण वितरण शिविर-2011

(14 सितम्बर 2011)

उ.पू.मंडल स्थित गांधी मेमो.सर्वो.बाल.विद्यालय शाहदरा दिल्ली -110032 के सभागार में कक्षा 1से8 तक के नि:शक्त विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकताओं के अनुकूल उपकरण वितरित किए गये। इस शिविर शाहदरा नार्थ जोन दिल्ली नगर निगम और शिक्षा निदेशालय के उत्तर पूर्व मंडल के सरकारी विद्यालयों मे पढरहे विशेष आवश्यकताओ वाले 141 बच्चो ने भाग लिया।













समारोह में उप शिक्षा निदेशक श्री आर.एन.शर्मा क्षेत्रीय उपशिक्षा अधिकारी डाँ.सरोज चमोली,क्षेत्रीय खेलकूद पर्यवेक्षक श्रीमती मंजू सक्सेना,जिला समंवयक डाँ.भारतेन्दु मिश्र ,क्षेत्रीय समंवयक श्रीवी.के.मित्तल-क्षेत्र-5,क्षेत्रीय समंवयक श्री सुरेश चन्द-क्षेत्र-4तथा क्षेत्रीय समंवयक श्रीमती ऋचा शर्माक्षेत्र-6 ने अपनी सक्रिय भागीदारी से नि:शक्त बच्चों का मनोबल बढाया।


हम आभारी हैं-

डाँ.समर भानु -प्रधानाचार्य.गाँधी मेमो.सर्वो.बाल विद्यालय शाहदरा ,

श्रीमती नीलम भाटिया-उप प्रधानाचार्य.सर्वो.कन्या विद्यालय शाहदरा,

संसाधन शिक्षक- तेजपाल(नगर निगम),भावना शर्मा(नगर निगम),मेघा तिवारी(एम.आर.),कोमल शुक्ला(एच.आई.)निधि कुमरा(एम.आर.)

आई.ई.वालिंटियर-शालू,सुमन तोमर और सुमन कुमारी सहित सभी आई.ई.डी.एस.एस. इंचार्ज अध्यापकों के जिनके सहयोग से ही यह समारोह सम्पन्न हो पाया।

विशेष आभार-श्री महेन्द्र सिंह जी(इंचार्ज -आई.ई.डी.एस.एस. गांधी मेमो.सर्वो.बाल.विद्यालय शाहदरा दिल्ली -110032) का जिन्होने दिन रात अपनी सेवा और लगन से इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग किया।

शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

District North East :Three Sessions for cwsn workers (2 , 3 & 5 august 2011)




Stress management sessions for c.w.s.n workers

(Three Sessions)

Regarding stress management for c.w.s.n. & I.E. workers zone wise three sessions were organized in each zone of District North East. Dr.Bhartendu Mishra-District coordinator convened all three meetings. All resource teachers, I.E. Volunteers & IEDSS In charge Teachers attended these sessions. Other matters were also discussed regarding update of school wise data for cwsn.

1. Date 2/8/2011

zone-5-venue: GGSSS Shivaji Park Delhi-110032

Mr.V.K.Mittal- Zonal Coordinator giving his talk-

2.Date 3/8/2011

zone-6 venue: SKV M.S.Park- 1 Delhi-110032

Mrs.Richa Sharma: Zonal Coordinator giving her talk-

Date 5/8/2011

zone-4 venue:- GGSSS.East of Gokalpur Loni road Delhi-110094

Mr.Suresh Chand - Zonal Coordinator giving his talk

Photos By: Nidhi Kumra (Resource teacher)

बुधवार, 20 जुलाई 2011


सफिया का हालचाल

(कविता)

जब से होश सँभाला

बस अम्मी के कन्धे पर रही

अस्पताल हो या पीरबाबा की मजार

स्कूल से घर और घर से स्कूल तक

अम्मी का कन्धा ही उसका रिक्शा बना

जब कभी अम्मी बीमार हुई उसे छुट्टी करनी पडी

तमाम दुआओं ताबीजों के बावजूद

अपने पैरों कभी खडी नही हो पायी सफिया

बैसाखी के बल मुश्किल था

स्कूल तक पहुँचना

रिक्शे के पैसे न थे

पर वो हारी नही

गरीबी और अपंगता से

लडती रही अकेली

बिना सहेली

फिर एक दिन सफिया को स्कूल से मिली

एक ट्राईसाइकल

उसकी सीट पर बैठकर पहलीबार

वो रोई थी देर तक खुशी से

अब तो उसके ख्वाबों के पर निकल आये हैं

वो अपने हाथों तय करती है

अपना सफर बेखौफ

सहेलियाँ भी पूँछ्ती हैं

सफिया का हाल चाल

रविवार, 17 अप्रैल 2011


.सलोनी की गुडिया
(कविता)
हीरे की कनी है सलोनी
उसकी आँखें बोलती हैं
और मुस्कान से खिल जाते हैं फूल
उसके हाथ मे हैं जादू
माँ ने सिखाया है उसे अँगुलियाँ चलाना
कैनवस कैसा भी हो
वो भरती है जीवन के रंग
फिर वो चित्र बोलते हैं
बनाती है गुडिया अपने जैसी
गुडिया की कजरारी आँखें तो कमाल हैं
टाँकती है सलमा सितारे
सलीके से काढती है उसकी ड्रेस
दिल्ली हाट मे जायेगी उसकी गुडिया
और वो झूमेगी उसे देखकर
करेगी इशारे अँगुलियो से
नाचेगी अपनी धुन मे
उसे बोलना नही आता

आवाज की दुनिया से नही है उसका नाता
प्रशंसा और निन्दा सब समान है उसके लिए
गुडिया के अलावा
नही है कोई सहेली
न घर में न पडोस में
न पाठशाला मे
बस गुडिया और पेंटिंग
पेण्टिंग और गुडिया के साथ
रहती है सलोनी गुमसुम-एकरस
मूकबधिर कठपुतली की तरह
*भारतेन्दु मिश्र

शनिवार, 26 फ़रवरी 2011




मन्दबुद्धि छात्र रचित बमनिया
के कुछ चित्र जिसे बन्द अँधेरी कोठरी से लाकर विद्यालय मे दाखिल कराया गया। अब उसकी माँ और अध्यापको के सहयोग से उसकी जिन्दगी मे बदलाव आना शुरू हुआ --






CASE STUDY OF RACHIT BAMANIA

REFERENCE

FATHER OF RACHIT BAMANIA SEND A LETTER TO CM , GNCT OF DELHI . COMPLAINING THAT HIS CHILD RACHIT BAMANIA S/O RANBEER SINGH BAMANIA R/O K-21,GALI NO-01, SUNDER NAGRI, DELHI-93 ,DIAGNOSED AS MENTALLY RETARDED IS NOT GETTING ADMISSION IN ANY SCHOOL THEREFORE, IN COMPLIANCE OF OUR TEAM (SH. B.MISHRA (DISTRICT COORDINATOR, SH. V.K.MITTAL (ZONAL COORDINATOR-ZONE -5, SMT. RICHA SHARMA ZONAL COORDINATOR ZONE 6, SH. SURESH CHAND ,ZONAL COORDINATOR ZONE 4 ,ALKA VERMA AND NIDHI KUMRA (RESOURCE TEACHER) VISITED ON DATE 15 JAN 2011 AT HIS RESIDENCE ,AFTER COUNCELLING OF PARENTS SPECIALLY MOTHER OF RACHIT BAMANIA CHILD WAS DIAGNOSED AS MENTALLY RETARDED. FINALLY HE WAS ADMITTED IN NEARBY SCHOOL GOVT. BOYS MIDDLE SCHOOL ,F1/F2,NAND NAGRI,DELHI. IN CLASS 6-G , ADDMISSION NO: 6340 ON 15 JANUARY 2011.

BEFORE ADMISSION CHILD WAS FOUND THAT PARENTS BEHAVED HIM LIKE A SALVES AND WAS KEPT IN A SMALL DARK ROOM ,HE WAS UNAWARE OF HIS ATMOSPHERE LIKE HIS SOCIETY ,HIS FRIENDS AND ONLY HIS BASIC NEEDS LIKE FOOD AND SHELTER WAS PROVIDED TO HIM, NO SOCIAL SKILLS AND COMMUNICATION SKILLS WERE DEVELOPED TILL ADMISSION.

RACHIT’S PARENTS MOTHER AND FATHER BOTH ARE WORKING MEMBERS AT LOW WAGES FOR THAT REASON THEY DIDN’T TAKE MUCH PAIN IN UPBRINGING THEIR MENTALLY RETARDED CHILD FOR HIS BRIGHT FUTURE.

  1. NAME OF THE CHILD : RACHIT BAMANIA

2. NAME OF THE PARENTS : SH. RANBEER SINGH BAMANIA

SMT. NISHA

3. NAME OF THE SCHOOL/ : GBMS, FI/F2, NAND NAGRI, DELHI

VILLAGE/DISTRICT ZONE-06, DISTRICT NORTH EAST

4. SCHOOL AND CLASS : GBMS, FI/F2, NAND NAGRI, DELHI

IN WHICH CHILD IS INCLUDED 6- G

5. HOW THE CHILD WAS CONTACTED :

IN COMPlIANCE OF HIS FATHER’S COMPLAINT FOR NOT GETTING

ADMISSION IN NEARY BY SCHOOL, TEAM FROM DISTRICT NORTH

EAST VISITED FOR THE SAME.

6. GRADUAL SUPPORT PROVIDED TO THE CHILD BY THE RESOURCE

TEACHER/VOLUNTEER:

THE CHILD IS BEING PROVIDED CONTINUE SUPPORTIVE EDUCATION FROM THE RESOURCE TEACHER ONCE IN A WEEK TO ENHANCE HIS DAILY LIVING SKILLS, COMMUNICATION, ACADEMIC , RECREATIONAL AND SOCIAL SKILLS

7. NATURE OF SUPPORT PROVIDED BY THE RESOURCE TEACHER/ VOLNTEER:

ACCORDING TO THE CHILD’S LEVEL AND SCHOOL ENVIRONMENT RESOURCE TEACHERS DEVELOPED CURRICULAM AND STRATEGIES TO BE USED TO TEACH THE BOY, SPECIAL EMPHASIS IS LAID ON EFFECTIVENESS OF BOYS INVOLVEMENT WITH CLASSMATES (PEER GROUP) TO IMPROVE HIS SOCIAL SKILLS, COMMUNACTION SKILLS AND ACADEMIC. TO FACILITATE WRITING OR FINE MOTOR ACTIVITIES HE IS HELPED WITH PRE WRITING SKILLS LIKE SCRIBBLING, COLOURING, SAND/CLAY PLAY, PLAYING WITH PEG BOARDS ETC. BY THE RESOURCE TEACHERS AND SIMILARLY HIS PARENTS AND PEER GROUPS ARE ALSO MOTIVATED TO HELP RACHIT IN PERFORMING SUCH ACTIVITIES AND BUILDING HIS COMMUNICATION SKILLS.

8. HOW THE SCHOOL CHANGED FOR THE CWSN:

THE CHILDREN OF THE SCHOOL AND RACHIT’S CLASSMATES WERE TOLD ABOUT RACHIT, BEFORE HIS ADDMISSION TO THE SCHOOL, ALTHOUGH THEY WERE FIRST ANXIOUS, THIS QUICKLY WORE OFF, THE SCHOOL TEACHERS AND PEER GROUP OF RACHIT WERE ORIENTED ABOUT RACHIT CONDITION. AFTER COUNCELLING OF TEACHER, PEER GROUP ALONG WITH IEDSS INCHARGE AND HOS SH. B.S.DHAKA, CHILD WAS WELL ADOPTED BY THE SCHOOL ENVIRONMENT.

9. HOW THE TEACHER TEACHES THE CHILD:

THE TEACHERS FOLLOW THE STRATEGIE AND CURRICULAM DEVELOPED BY THE RESOURCE TEACHER TO ENHANCE HIS ACADEMIC. SOCIAL AND COMMUNICATION SKILLS.

10. HOW THE PEERS HAVE ACCEPTED THE CHILD:

THE SCHOOL PRINCIPAL SH.B.S. DHAKA AND TEACHERS ARE VERY COOPERATIVE IN HELPING RESOURCE TEACHER TO MOTIVATE THE PEER GROUP INTERACTION AT THE SCHOOL WHICH IS VERY EFFECTIVE IN ENHANCING RACHIT’S COMMUNICATION AND SOCIAL SKILLS.

11. HOW THE CWSN IS INCLUDED ON ALL THE ACTIVITIES OF THE

SCHOOL/CLASSROOM:

EARLIER RACHIT WAS RELUCTANT TO GO TO SCHOOL BUT GRADUALLY HE BEGAN TO ENJOY GOING TO SCHOOL AND IS VERY EXICTED. IT WAS NOTICE THAT HIS OTHER ABILITIES LIKE PLAY AND SOCIAL SKILLS HAVE REMARKABLY IMPROVED, PARENTS OF THE CHILD ARE VERY HAPPY FOR THE CHANGE THEY HAVE SEEN IN RACHIT AND THEY OFTEN SHOW THEIR GRATITUTE TO BOTH RESOURCE TEACHERS AND SCHOOL TEACHERS. PRIOR ADMITTING THE BOY IN THE GOVT. SCHOOL, PARENTS HAD APPREHENSION ABOUT HIS SUITABILITY TO A REGULAR SCHOOL BUT AFTER THEY HAVE EXPERIENCED EVEN LITTLE CHANGE AND PROGRESS IN HIM, THEY HAVE DECIDED TO CONTINUE IN THE SAME SCHOOL.

THE SUCCESS OF HIS INTEGRATION INTO A NORMAL SCHOOL SEEMS TO BE MAINLY DUE TO VERY SUPPORTIVE FAMILY ON ONE HAND AND ON THE OTHER TO A VERY SYMPATHETIC AND COOPERATIVE STAFF AND STUDENTS OF THE SCHOOL.

12. HOW THE CHILD HAS IMPROVED:

EARLIER HIS MOTHER COMPLAINTS OF DELAYED MILESTONES, UNCLEAR SPEECH, POOR ATTENTION, POOR GAIT AND INABILITY TO READ AND WRITE. HE CAN WALK WITHOUT AIDS BUT DOES SO SLOWLY AND SHAKILY. HE CANNOT USE HIS RIGHT HAND FOR WRITING AND CANNOT HOLD THE PENCIL FIRMLY IN HIS LEFT HAND. HE HAS A LITTLE SPEECH BUT SLURRED SPEECH. ACADEMICALLY RACHIT IS POOR BUT SOCIALLY HE HIS WELL ACCEPTED AND HAPPY CHILD.

SOME SNAPS OF RACHIT’S REMARKABLE IMPROVEMENT HAS BEEN SHOWEN IN THE PHOTOGRAPHS ATTATCHED WITH CASE STUDY)

13. WHAT IS THE FUTURE PLAN:

A REGULAR RESOURCE TEACHER SHOULD BE PROVIDED IN THE SCHOOL WITH TLM FOR BETTER LEARNING OF CHILD IN HIS SKILLS LIKE ADL, SOCIAL, COMMUNICATION AND RECREATIONAL SKILLS,

(I.Q. TESTING OF THE CHILD IS STILL PENDING BY IHBAS)

14. WRITING /DRAWING/SCRIBBLING SAMPLES OF THE CHILD:

PHOTOGRAPHS ATTACHED FOR ABOVE.

SUBMITTED BY:

RESOURCE TEACHER

DISTRICT NORTH EAST

रविवार, 23 जनवरी 2011

आकलन शिविर संपन्न

facebook
सर्व शिक्षा अभियान के सौजन्य से आयोजित
उ.पूर्व मन्डल तथा शाहदरा नार्थ जोन नगर निगम के विद्यालयों में           पढ रहे नि:शक्त बच्चो का दो दिवसीय
 आकलन शिविर सम्पन्न
(दि.19-1-2011तथा20-1-2011)
नि:शक्त छ्त्राओं द्वारा दीपप्रज्वलन  
आकलन हेतु आये बच्चे तथा बच्चों के अभिभावक 



स्थान:राजकीय वरि.बाल.विद्यालय डीडीए. फ्लैटस लोनी रोड,दिल्ली-110093

उ.पूर्व मंडल यमुना विहार तथा शाहदरा नार्थ जोन के सरकारी विद्यालयो में पढ रहे नि:शक्त बच्चो की आवश्यकताओ को देखते हुए हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी दो दिवसीय आकलन शिविर का आयोजन किया गया।
पंजीकरण करते आई.ई.वालिण्टियर 
इस दो दिवसीय आकलन शिविर में 356 बच्चो ने अपनी आवश्यकताओ के आकलन के लिए भाग लिया। जिनमे O.H., H.I.  और V.I.कैटेगरी के बच्चे शामिल थे। इनमे से लगभग 200 बच्चो को विभिन्न उपकरणो के लिए चुना गया।कुछ अन्य बच्चो को अन्य चिकित्सा हेतु परामर्श भी दिया गया। सभी कैटेगरी के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा और एलिम्को कानपुर से आयी टीम ने इस आकलन शिविर के बच्चो का आकलन किया। प्रस्तुत हैं आकलन शिविर की कुछ छवियाँ-
पैर की माप लेते एलिम्को कानपुर की टीम
आँखों की जाँच हेतु लाइन मे छात्र
आडियोमीटरी करवाती छात्रा
प्रधानाचार्य श्री सी.पी.सिंह द्वारा मार्गव्यय और लंचपैक का वितरण
निरीक्षण हेतु पधारे उप शिक्षा निदेशक (आई.ई.डी.एस.एस.)
श्री आर.पी.यादव के साथ शिविर के कार्यकर्ता 




 दूसरे दिन(20-1-2011)
 का
 आकलन शिविर कुछ चित्र:
नगर निगम की छात्राओं द्वारा दीपप्रज्वलन
 शिविर पर्यवेक्षक स्पेशल एजूकेटर श्री इदरीस अहमद
और शिविर के कार्यकर्ता उद्घाटन  के अवसर  पर
आकलन हेतु आये बच्चो के शिक्षक और अभिभावक
आकलन हेतु आये बच्चो के शिक्षक और अभिभावक
चश्मे का नम्बर देते चिकित्सक
उपकरण हेतु जाँच करते चिकित्सक   
कान का परदा जाँचते चिकित्सक
आँखो की जाँच करती आप्टोमीटरिस्ट
कान की जाँच करता आडियोमीटरिस्ट
शिविर का निरीक्षण करते उप शिक्षा निदेशक (उ.पूर्व )श्री आर.एन.शर्मा 
अभिभावकों को सन्देश देते
उप शि.नि.(उ.पूर्व) श्री आर.एन.शर्मा
पर्यवेक्षक श्री इदरीस अहमद द्वारा छात्र को मार्गव्यय और लंचपैक का वितरण